अज्ञेय के काव्य में वात्सल्य भावना -डाॅ. मुकेश कुमार

आधुनिक कविता के जनक प्रयोगवादी कवि अज्ञेय जी ने अपनी कविताओं में माँ की ममता, बालक की हठ, भविष्य में उन्नति, भावुकता, चंचलता, माँ की करूणा, बालक का भगवान जैसा रूप, माँ के प्रति सेवा भावना आदि का वर्णन करके समाज में युवा वर्ग को उजागर करने की प्रेरणा दी है।

रघुवीर सहाय के काव्य-सर्जना में जीवन संघर्ष-डाॅ. मुकेश कुमार

रघुवीर सहाय स्वाधीन भारत के उन महत्त्वपूर्ण रचनाओं में से थे, जिनकी रचनाओं में स्वातंत्रयोत्तर भारत के विविध रूप और समस्याएँ सम्पूर्णता से उद्घाटित हुई हैं। उनकी रचनाएँ गतिशील जीवन यथार्थ से हमेशा सार्थक संवाद बनाए रही हैं। सहज और सामान्य के प्रति उन्मुखता उनकी रचनाओं का केन्द्रीय स्वर है। ये रचनाएँ जीवन कीn छोटी से छोटी वास्तविकता को अपने में समाहित करना चाहती हैं।

पंडित सोहनलाल द्विवेदी के काय्य में राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक जागरण-डाॅ. मुकेश कुमार

संस्कृति मानव जीवन को संस्कार प्रदान करने वाली एक निरन्तर प्रक्रिया है। वह एक ऐसी चेतना है जो जीवन के समस्त व्यापारों एवं गतिविधियों में अन्तःसलिला की तरह प्रवाहमान रहती है। वह मानव को एक विशिष्ट जीवन-दृष्टि प्रदान करती हुई व्यक्तिगत एवं समाजगत नैतिक जीवन-मूल्यों व आदर्शों की ओर अग्रसर करती है। इसी प्रकार से भारतीय संस्कृति विश्व की अन्य संस्कृतियों की तुलना में अपना विशिष्ट महत्त्व रखती है।

आधुनिक हिन्दी कवियों की राष्ट्रीय भावना-डाॅ. मुकेश कुमार

आधुनिक हिन्दी काव्यधारा की राष्ट्रीय परम्परा में कवियों की सूची लम्बी है लेकिन कुछ विशेष कवियों की राष्ट्रीय चेतना को प्रस्तुत किया गया है। इन कवियों ने राष्ट्र के स्वर्णिम अतीत के चित्रण द्वारा उज्ज्वल भविष्य के निर्माण का संदेश दिया है। प्राधीनता के बन्धनों को काटना इनके काव्य का लक्ष्य है और राष्ट्र का सर्वोमरुखी उत्थान ही इनका प्रतिपाद्यय है।

अज्ञेय के काव्य सर्जना : परम्परागत प्रतीकों का नया प्रयोग-डाॅ. मुकेश कुमार

तार सप्तक के जन्मदाता अज्ञेय ने अपनी कविता में प्रतीकों के स्तर पर भी अपनी परम्परा के साथ प्रयोग किये हैं| उन्होंने परम्परागत प्रतीकों का प्रयोग नये संदर्भों में किया है। जिससे पुराने प्रतीक नये-भाव बोध को व्यक्त करने में सफल हुए हैं। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि अज्ञेय ने पारम्परिक प्रतीकों का सर्जनात्मक प्रयोग किया है।

कामायनी में भारतीय संस्कृति का चित्रण -डाॅ. मुकेश कुमार

भारतीय संस्कृति किसी जाति-विशेष की संस्कृति नहीं है। इसमें समय-समय पर आर्य-अनार्य तथा अन्य अनेक जातियों की संस्कृति का भी सम्मिश्रण होता रहा है। किन्तु यह सम्मिश्रण इस रूप में हुआ है कि अब उनका स्वतन्त्र व्यक्तित्व एवं रूप पृथक् रूप में दिखाई नहीं देता। फिर भी, अध्ययन की सुविधा के लिए, भारतीय संस्कृति के विविध रूपों का उल्लेख किया जा सकता है, यथा-

सियारामशरण गुप्त के काव्य में राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक नवजागरण -डाॅ. मुकेश कुमार

भारतीय संस्कृति के परम उपासक सियारामशरण गुप्त जी का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के अर्न्गत झांसी-कानपुर राजमार्ग पर स्थित चिरगाँव कस्बे में भाद्र पूर्णिमा, बुधवार सम्वत् 1952 वि. तदनुसार 04 सितम्बर, 1895 ई. को हुआ | पिता का नाम-सेठ रामचरण जो अपने समय और संस्कृति के प्रसिद्ध कवि थे। सेठ रामचरण के पाँच पुत्र थे-महारामदास, रामकिशोर, मैथिलीशरण गुप्त, सियारामशरण गुप्त, चारुशीलाशरण।

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के काव्य में चित्रित प्रेम-भावना-डाॅ. मुकेश कुमार

कवि अज्ञेय के काव्य में प्रेम की अवधारणा को स्पष्ट किया गया है। अज्ञेय की प्रेम-भावना में निरन्तरता है। उन्होंने प्रेम का प्रतिफलन विशुद्ध मानवीय रूप में किया तथा प्रेम-भावना में नैसर्गिकता के पक्षघर रहे। अज्ञेय के काव्य में प्रेम की अभिव्यक्ति मात्र प्रणय-भाव से ही नहीं, अपितु व्यापक परिप्रेक्ष्य में भी की गई |

राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त और उनकी राष्ट्रीयता-डाॅ. मुकेश कुमार

साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, दीपक भी होता है। राष्ट्रीय साहित्य रूपी विशाल दीपक में अनेक बत्तियाँ अपना प्रकाश फैला रही थी | जन आक्रोश को उत्पन्न एवं विस्तार दे रही थी। इन अनेक बत्तियों में एक महत्त्वपूर्ण बाती थी मैथिलीशरण गप्त जी।

सुमित्रानंदन पंत के काव्य में सांस्कृतिक चेतना-डाॅ. मुकेश कुमार

पंत की विचारधारा पर धर्म सम्बन्धी दृष्टिकोण से भारतीय धर्म का पूर्ण समर्थन नहीं मिलता। उन्होंने परम्परागत धर्म की रूढ़ियों से असंतुष्ट होकर निरीश्वरवाद की विचारधारा का समर्थन किया है और पाश्चात्य भौतिकवादी सभ्यता से प्रभावित होकर कवि ने धर्म को संकीर्ण अर्थ में न ग्रहण कर ‘मानव धर्म’ के अर्थ में लिया है। उन पर ईसाई धर्म का व्यक्ति, स्वतंत्र निरीश्वरवादी धर्म और कालान्तर में अरविन्द वादी विचारधारा का प्रभाव दीख पड़ता है।