आलेख

अभिमन्यु अनत के साहित्य में भारतीय संस्कृति का चित्रण- डाॅ. मुकेश कुमार

“माॅरीशस के हिन्दी साहित्य सम्राट, प्रवासी हिन्दी साहित्य के अग्रणी हस्ताक्षर डाॅ. अभिमन्यु अनत का जन्म 9 अगस्त, 1937 को माॅरीशस के उत्तर प्रांत में स्थित त्रियोले गाँव में एक निर्धन परिवार में हुआ था। एक अति सामान्य पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक क्षितिज पर अपनी अनन्य पहचान बनाने वाले अभिमन्यु अनत का नाम …

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नरेश मेहता के काव्य में प्रकृति चित्रण- डाॅ. मुकेश कुमार

नरेश मेहता प्रकृति के परम प्रेमी हैं। संवेदना, भाव, विचार आदि दृष्टि से देखी गई प्रकृति भेदता के मन में अद्भुत प्रभा और प्रभाव का संचार करती है। जिसमें बादल, बिजली, वर्षा, वायु, सूर्य, चन्द्रमा, वन, वनस्पति, सागर, झील, नदी, नाले, खेत-खलियान, फूल, पत्ती, पेड़-पौधे आदि का वर्णन कवि द्वारा बड़ी गहनता के साथ किया …

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श्रीधर पाठक के काव्य में राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक चेतना- डाॅ. मुकेश कुमार

बहुआयामी प्रतिभा के स्वामी, पारगामी ऋतम्भरा प्रज्ञा के अनुयायी, भावयित्री एवं कारयित्री प्रतिभा के धनी, राष्ट्रीय चेतना एवं भारतीय संस्कृति के उन्नायक पं. श्रीधर पाठक का जन्म 11 जनवरी सन् 1860 ई. को आगरा ज़िला के जोंधरी नामक ग्राम में हुआ। आपके पिता जी का नाम पं. लीलाधर और पितामह का नाम धरणीधर शास्त्री था। …

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संत ब्रह्मानंद सरस्वती के काव्य में भारतीय संस्कृति का चित्रण- डाॅ. मुकेश कुमार

संत ब्रह्मानंद सरस्वती भारतीय संस्कृति के उपासक थे। इसी संस्कृति के कोमल एवं कठोर संस्कार, सनातन एवं नूतन जीवन मूल्य, भावबोध और कर्मबोध, उद्दान्त जीवन चिन्तन और भावुकतापूर्ण रस साधना अनेक अवसर पर उनकी विचार सारणी को विशिष्ट बनाने में समर्थ हुए। वे एक मानवतावादी संत थे। जिसने सत्य, परोपकार, संयम, सच्ची मित्रता, नैतिकता, यज्ञ, गौरक्षा …

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