लेख

हिन्दी की संत काव्य परम्परा में संत ब्रह्मानन्द सरस्वती की उपादेयता-डॉ मुकेश कुमार

संत साहित्य केवल हिन्दी साहित्य में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व साहित्य में अपना विशेष स्थान रखता है। संतों की सुदीर्घ परम्परा और विशाल साहित्य ने हिन्दी साहित्य भण्डार और भारतीय जनमानस को आध्यात्मिक रूप से सिंचित किया था। अति प्राचीन काल से प्रवाहित भक्तिपरक चिंतनधारा को युगानु रूप परिपुष्ट करके जन हृदय में उतारना …

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संत गरीबदास की वाणी में नैतिक मूल्य- डॉ. मुकेश कुमार

मानव सभ्यता और संस्कृति के विकास में मूल्यों का महत्त्व सर्वोपरि है। वर्तमान परिवेश में वैज्ञानिक उन्नति तथा नीति मूल्यों के वैविध्य के कारण पुराने मूल्य घट गए और नए मूल्य उस स्थान पर आ चुके हैं। संत गरीबदास ने अपनी वाणी के माध्यम से मानव को ईश्वर प्राप्ति के लिए नीति मूल्यों का पाठ …

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भूमण्डलीकरण का दौर और हिन्दी कविता- डाॅ. मुकेश कुमार

भूमण्डलीकरण के दौर में काव्य की गहरी चिन्ता का प्रश्न बनकर खड़ा है। यह अकारण नहीं है कि किसी काव्य में कवि ने इस दौर का बखान नहीं किया हो, उस विषय में गहरी सोच पैदा होती है   भूमण्डलीकरण और लुटेरी व्यवस्थाओं और भूखी आबादियों का वर्तमान है। यह एक रोमांचक मानवीय अतीत को …

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अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की सीता-डॉ. मुकेश कुमार

शोध सारांश – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित ‘वैदेही वनवास’ एक मात्र ऐसा महाकाव्य है, जो पूर्ण रूप से सीता जी पर आधारित है। इस महाकाव्य को 18 सर्गों में विभक्त किया हुआ है। इस महाकाव्य पर पूर्णतः वाल्मीकि रामायण का प्रभाव दिखाई देता है। सीता इसमें ऐसी पात्र है जो परम पवित्रता, कष्ट सहिष्णुता, …

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संत ब्रह्मानन्द सरस्वती और उनका जीवन दर्शन-डॉ. मुकेश कुमार

जब सूर्य का उदय होता है तो अन्धकार का विनाश निश्चित ही होता है। कस्तूरी अपनी सुगन्ध वातावरण में फैलाकर सारे पर्यावरण को सुगन्धित बना देती है। उसी प्रकार विश्व कल्याण के लिए व अज्ञान के अन्धकार को समाप्त करने के लिए इस पवित्र धरा पर भगवान किसी न किसी महापुरुषों, सन्तों के रूप में …

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